अफ्तार अहमद फर्स्ट एडिटर न्यूज़ सुल्तानपुर
सुलतानपुर जनपद के शहर स्थित मदरसा जामे इस्लामिया खैराबाद में 77वां यौमे-जम्हूरिया पूरे हर्षोल्लास, शांति और राष्ट्रीय एकता के संदेश और हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद के नारों 





के साथ समारोहपूर्वक मनाया गया, जहां मौलाना मोहम्मद उस्मान कासमी की सदारत में आयोजित कार्यक्रम में ओलमा, बुद्धिजीवी, सुलतानपुर जनपद के शहर स्थित मदरसा जामे इस्लामिया खैराबाद में 77वां गणतंत्र दिवस के मौके पर हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगे। पूरे हर्षोल्लास, शांति और राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ समारोहपूर्वक मनाया गया, जहां मौलाना मोहम्मद उस्मान कासमी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में ओलमा, बुद्धिजीवी, पत्रकार, अधिवक्ता और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
समारोह के दौरान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम समाज की भूमिका, संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, लोकतंत्र की मजबूती और गंगा-जमुनी तहज़ीब की परंपरा पर विस्तार से विचार रखे गए। मौलाना मोहम्मद उस्मान कासमी ने 1857 से पहले अंग्रेजों के खिलाफ दिए गए फतवों और संविधान सभा में मौलाना हसरत मोहानी के विचारों का उल्लेख करते हुए देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार कमलनयन पांडेय ने मदरसे में गणतंत्र दिवस मनाए जाने को आपसी सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता अब्दुल करीम ने संविधान लागू होने के बाद नागरिकों को मिले अधिकारों को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताया, जबकि जिला सुरक्षा संगठन के महासचिव हाजी मोहम्मद इलियास खान ने देश की तरक्की को गंगा-जमुनी तहज़ीब से जोड़ा।
कार्यक्रम में मौलाना कसीम कासमी, रिज़वान अहमद पप्पू, अब्दुल माबूद खान, सईद अहमद चांद, जलील अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय एकता, संविधान सम्मान और आपसी भाईचारे का सशक्त संदेश देने वाला बन गया।, अधिवक्ता और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। समारोह के दौरान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम समाज की भूमिका, संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, लोकतंत्र की मजबूती और गंगा-जमुनी तहज़ीब की परंपरा पर विस्तार से विचार रखे गए। मौलाना मोहम्मद उस्मान कासमी ने 1857 से पहले अंग्रेजों के खिलाफ दिए गए फतवों और संविधान सभा में मौलाना हसरत मोहानी के विचारों का उल्लेख करते हुए देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार कमलनयन पांडेय ने मदरसे में गणतंत्र दिवस मनाए जाने को आपसी सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता अब्दुल करीम ने संविधान लागू होने के बाद नागरिकों को मिले अधिकारों को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताया, जबकि जिला सुरक्षा संगठन के महासचिव हाजी मोहम्मद इलियास खान ने देश की तरक्की को गंगा-जमुनी तहज़ीब से जोड़ा। कार्यक्रम में मौलाना कसीम कासमी, रिज़वान अहमद पप्पू, अब्दुल माबूद खान, सईद अहमद चांद,जलील अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय एकता, संविधान सम्मान और आपसी भाईचारे का सशक्त संदेश देने वाला बन गया।