
अफ्तार अहमद फर्स्ट एडिटर न्यूज़ सुल्तानपुर
सुल्तानपुर की नेकराही दरगाह पर दूसरे दिन बंटा लंगर और हुई महफिल
सुल्तानपुर के नकराही स्थित सूफी संत वारिस अली शाह की दरगाह पर सोमवार रात उर्स का दूसरा दिन था। इसमें जिले और दूसरे प्रदेशों से सभी धर्मों के लोग पहुंचे। हजारों लोगों के लिए शाकाहारी लंगर रखा गया।
दूसरे दिन ईद-मिलादुन नबी और मौलाए काएनात की महफिल हुई। जश्ने वारिस पाक का उर्स रातभर चला।
बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले और फिलहाल पुणे में रह रहे चंदन कुमार ने बताया कि उन्हें 2011 से उर्स की जानकारी है। वे पहले समस्तीपुर और मुक्तापुर के उर्स में शामिल होते थे। उन्होंने कहा कि यहां किसी तरह का भेदभाव नहीं है और हिंदू-मुस्लिम सभी साथ रहते हैं।
गांधीनगर, जायस और रायबरेली से आए कामता प्रसाद पाल ने बताया कि वे करीब 15-16 साल से दरगाह आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां आने पर उन्हें घर जैसा लगता है।
बिहार के रोहतास जिले के विक्रमगंज से आए भोला श्रीवास्तव ने बताया कि वे 2018 से यहां आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें दरगाह पर सुकून मिलता है। लंगर में दाल, रोटी और चावल दिया गया।
दरबार-ए-मखदूम बिहार शरीफ से जुड़े डॉ. जुबैर खान ने बताया कि वे पांच साल की उम्र से बाबा के दरबार से जुड़े हैं। उनके मुताबिक, यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के लोग बिना भेदभाव साथ बैठते और एक-दूसरे से गले मिलते हैं। यहां अमीर-गरीब और ऊंच-नीच का फर्क नहीं रहता।
डॉ. खान ने अपनी मां के इलाज का अनुभव भी बताया। उनके मुताबिक, मां के गर्भाशय में कैंसर का पता चला था और ऑपरेशन की तैयारी हो चुकी थी। इसके कुछ दिन बाद दोबारा जांच में कैंसर नहीं मिला।